एसएसजे विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के विद्यार्थियों का शैक्षणिक भ्रमण सातताल, नौकुचियाताल और रामगढ़ क्षेत्रों में आयोजित हुआ

भूगोलविद पृथ्वी तल को जिस दृष्टिकोण से देखते हैं वह दृष्टिकोण उनको सिर्फ पुस्तकों से नहीं मिलता है। इस दृष्टिकोण को हासिल करने के लिए पृथ्वी के विभिन्न हिस्सों का गहन अवलोकन किया जाता है ताकि क्षेत्र विशेष की विशेषताओं और साथ ही वहां की समस्याओं से अवगत हो सकें और उनके सटीक हल भी सुझा सकें। क्षेत्रीय सर्वेक्षण का महत्व विभिन्न क्षेत्रों की विशेषताओं, संसाधनों, और जनसंख्या को समझने में है। यह भौगोलिक संरचना, जलवायु, वन्यजीव, और प्राकृतिक संसाधनों का अध्ययन करके विभिन्न क्षेत्रों की विकास की योजनाओं को तैयार करने में मदद करता है। इससे सामाजिक, आर्थिक, और पर्यावरणीय प्रभावों का सही अनुमान लगाया जा सकता है और संभावित समाधान तैयार किया जा सकता है। भूगोल दो तरह से पृथ्वी तल को समझने की कोशिश करता है एक भौतिक पक्षों में और दूसरा मानवीय पक्षों में। भूगोल वेत्ता को दोनों पक्षों का अवलोकन कर एक संतुलित अध्ययन प्रस्तुत करते हैं जो अन्ततोगत्वा मानव कल्याण पर बल देता है।  

 इसी क्रम में सोबन सिंह जीना विश्व विद्यालय के भूगोल विभाग के स्नातक छठे सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं का शैक्षणिक भ्रमण दिनांक 31-5-2024 को सातताल, नौकुचियाताल और रामगढ़ क्षेत्रों में आयोजित किया गया। 

भ्रमण में सबसे पहले विद्यार्थियों को कोसी और सुयाल नदियों के संगम और कोसी नदी में मानव जनित कारकों के कारण हो रहे अवसादीकरण से होने वाली हानियों के विषय में अवगत कराया गया। अपरदन और अपक्षय की क्रिया एक प्राकृतिक क्रिया है उसे पूर्ण होने में कई सौ वर्ष लग जाते हैं लेकिन मानव के द्वारा मशीनों से वह प्रक्रिया मात्र कुछ घंटों में ही हो जाती है और जो सिल्ट नदी में धीरे-धीरे लम्बे समय में जाती है वह एकाएक चली जाती है जिससे नदियों का भौतिक और जैविक दोनों तरह का संतुलन खराब हो रहा है। 

 इसके बाद कैंची धाम होते हुए नौकुचियाताल पहुंचे। मार्ग में विद्यार्थियों के साथ कैंची धाम में प्रतिदिन लगने वाले जाम और छोटी सी जगह में इतने सारे पर्यटकों के आने से वहां के इकोसिस्टम पर पड़ने वाले प्रभावों की चर्चा की।  

भवाली -भीमताल होते हुए नौकुचियाताल पहुंचे। यहाँ विद्यार्थियों के साथ झील प्रदेश, जो कि कुमाऊं मंडल के नैनीताल जिले में है, के विषय में बताया। इन झीलों की उत्पत्ति पर बात की। सभी नौजवान भूगोल विदों ने पृथ्वी के प्राचीनतम परिहन के साधन नाव का आनंद लिया। फिर सात ताल होते हुए रामगढ़ से भ्रमण की वापसी की। प्यूड़ा में ताज़े आड़ू खाये। क्षेत्र में पर्यटन को लेकर प्राध्यापकों ने कई तरह के प्रबन्धन को लेकर बात की जिससे जाम की समस्या कम हो, पर्यावरण बचा रहे और मानव समेत सभी जीवों का अस्तित्त्व बचा रहे। 

 इस भ्रमण में विभागाध्यक्ष डॉ ज्योति जोशी, डॉ दीपक, डॉ अरविंद सिंह यादव, डॉ नरेश पन्त और डॉ पूरन जोशी ने छात्र- छात्राओं का मार्ग दर्शन किया।