“करोड़पति रातों रात के ड्रीम 11” – मदन मोहन तिवारी “पथिक” की स्वरचित कविता

करोड़पति रातों रात के ड्रीम 11 जितना घर में छुपा कर रखा था, सब कुछ खेंच डाला है। कमबख्त करोड़पति बनने की चाह में, सब…

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बुलंदी मंच से संपन्न हुआ गढ़वाल मंडल का अंतरराष्ट्रीय वर्च्युअल कवि सम्मेलन

बुलंदी साहित्यिक सेवा समिति द्वारा 30 अप्रैल की संध्या को गढ़वाल मंडल की शाखा द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर का वर्च्युअल कवि सम्मेलन आयोजित किया गया कार्यक्रम…

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मजदूर दिवस पर पढिए कक्षा 10 वीं के छात्र आदित्य कुमार की स्वरचित कविता, जिसमें एक माँ की दीनता, मजबूर पिता की बेबसियां और बच्चे पर उसकी प्रभाविता है..

पोषण और कुपोषण  दो रोटी को तरसते हैं, बात क्या बताए पोषण की बच्चे शिकार क्यों न हो माँ थी शिकार कुपोषण की पालवा चाह…

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“चाहते तो सब हैं” – अंकिता पंत की स्वरचित कविता

चाहते तो सब हैं  चाहते तो सब हैं उनकी जिंदगी खुशहाल बने  पर बात तो तब बने जब दुआ में उठे ये हाथ  किसी जरूरतमंद…

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राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज नैनीताल के छात्र राकेश उप्रेती की स्वरचित कविता – “मेरी प्यारी बहना”

बहन भी दोस्त भी तुम, तुम बेशक दूर हो हमसे, माना बाते नही होती हमारी, दिन गुजर जाते है, कभी महीने बीत जाते है, तुमसे…

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“जलते जंगल” – पहाड़ों में गर्मियों के मौसम में जलते हुए जंगलों को देख युवा कवि मदन मोहन तिवारी “पथिक” द्वारा लिखी गई स्वरचित कविता

ये कैसा युद्ध है ये कैसा दंगल, क्यों धूं धूं कर हैं जलते जंगल। तपिश हृदय में है धरा झेलती। किसकी खुशी है ये अमंगल।…

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विश्व विरासत दिवस/विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर कवींद्र पंत की स्वरचित कविता

       ‘महल’-1 सुना है, कभी यहां महल खड़े रहते थे। दुर्भेध्य, जिनकी चाहरदीवारी के भीतर पग वैरी न आने पाते थे। सुंदर सुंदर…

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“अकेलापन” – राकेश उप्रेती की स्वरचित कविता

“अकेलापन” …..अकेले थे अकेले है  अब शायद अकेले ही रहेंगे कुछ गलती अपनी है  कुछ किस्मत ऐसी है कुछ फिर से टूट जाने का डर …

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“बजट खपाओ,बजट खपाओ” – युवा साहित्यकार मनी नमन की हास्य व्यंग्य रचना

जितना भी है लाओ लाओ! बजट खपाओ बजट खपाओ…….. कोषागार ना मिलकर आया,आब्जेक्शन इसलिए लगाया, कितने चक्कर मुझे घुमाया,फिर बाबू ने सब समझाया, भैया क्यों…

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युवा कवियत्री मानसी जोशी की होली पर्व पर स्वरचित कविता

होली  बसंत की फुहार और फागुन की बहार देखो प्रिय!  आया होली का त्यौहार रंगीले रंगो से रंगने को तैयार हूं मैं प्रिय! राग, द्वेष…

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