बेरोजगारी पर खुशनुमा परवीन की स्वरचित कविता

बेरोजगारी ने सब‌का किया बुरा हाल,  ‌बेरोजगारी ने सब‌का किया बुरा हाल, भारत के लोग सभी है परेशान, हाथ में डिग्री नौकरी नहीं क्या यही…

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“रावण की पुकार” – दशहरे के अवसर पर यह व्यंग्य कविता

राजनीति से उलझी दुकान मे, भारी भीड़ से भरे मैदान में एक लम्बा काफिला आया, लम्बी प्रतीक्षा के बाद नेताजी ने धनुष उठाया! पूरा ही…

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“आज की नारी सब में भारी” – बालिका दिवस पर खुशनुमा परवीन की स्वरचित कविता

आज की नारी सब में भारी, आज की नारी सब में भारी, ओलंपिक में जीती भारतीय नारी, पुरुषों को छोड़ा पीछे दिखाया अपना दम, भारतीय…

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“हमारा उत्तराखण्ड” – खुशनुमा परवीन की स्वरचित कविता

हमारा उत्तराखण्ड हमारा उत्तराखण्ड है सबसे प्यारा, सभी राज्यों से है यह न्यारा, उत्तराखण्डी हमारी पहचान है, क्योंकि उत्तराखण्ड राज्य से ही हमारी शान है,…

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हिंदी दिवस पर युवा कवियत्री मानसी जोशी द्वारा लिखी गई स्वरचित कविता

हिंदी दिवस भाषा हमारी हिंदी है, अपनाते तुम अंग्रेजी हो, क्यूं मानव तुम मुझे इतना अपमानित करते हो। अंग्रेजी बोलने की होड़ में, मुझे भूलते…

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“मातृभाषा हिन्दी” – हिंदी दिवस पर युवा कवि मदन मोहन तिवारी “पथिक” की स्वराचित कविता

मातृभाषा हिन्दी पैदा हिन्दी से हुए पर, क्या वाकई में हिन्दी हैं अब हम? हिन्दी से अस्तित्व है, फिर क्यों हिन्दी भूल गए हैं हम?…

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“अनपढ़ नहीं हूँ साहब” – हिंदी दिवस पर युवा कवि दीप प्रकाश “माही” की स्वरचित कविता

“अनपढ़ नहीं हूँ साहब” हिंदी में लिखना उतना ही अच्छा लगता है जितना माँ के हाथ का खाना.. हिंदी में बात करना उतना ही अच्छा…

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हिंदी दिवस पर इंद्रा गोस्वामी की स्वरचित कविता

देखो 14 सितंबर का दिन आया है हिन्दी दिवस का दिन लाया हैं माँ की ममता है हिन्दी पिता की छाया हैं हिन्दी हिन्दी है…

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हिंदी दिवस पर खुशनुमा परवीन की स्वरचित कविता

हिन्दी दिवस  ‌‌ हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा हिन्दी से है, भारत का नाता, हिन्दी भाषा नहीं हमारा स्वाभिमान है क्योंकि, हिन्दी भाषा से ही भारत का…

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बुलंदी संस्था द्वारा आयोजित विश्व का सबसे बड़ा 207 घंटे चलने वाला वर्चुअल कवि सम्मेलन इंडिया वर्ल्ड रिकॉर्ड में हुआ दर्ज़

‌बुलंदी जज़्बात-ए- कलम साहित्य संस्था द्वारा 11 जुलाई से 20 जुलाई तक ऑनलाईन वर्चुअल कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। जिसका प्रसारण हिंदी टाइम्स टी वी…

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