पहाड़ एक्सप्रेस की पर्यटन और होटल इंडस्ट्री से जुड़े हुए लोगों से खास मुलाकात, जानिए उत्तराखंड के पर्यटन से जुड़े लोगों का दर्द उन्हीं की जुबानी….. पर्यटन व्यवसाय की बदहाली पर सरकार की खामोशी क्यों?

पर्यटन व्यवसाय की बदहाली पर सरकार की ख़ामोशी क्यों?
उत्तराखंड एक उच्च हिमालयी प्रदेश है, यहाँ का कुल 86% से ज्यादा क्षेत्रफल पहाड़ी है। जिस कारण यहाँ पर क़ृषि एवं उद्योग ना की बराबर हैं और अगर हैं भी तो वो मैदानी इलाकों में, जो कि कुल क्षेत्रफल का 14% भी नहीं है।
यहाँ पर चार धाम, हरिद्वार, ऋषिकेश जैसे धार्मिक एवं नैनीताल, मसूरी, कौसानी मुनस्यारी आदि शानदार पर्यटन स्थल मौजूद हैं। साहसिक पर्यटन की भी अपार संभावनाएं उत्तराखंड में हैं, इसलिए उत्तराखंड में पर्यटन उद्योग काफ़ी फल फूल रहा है। शायद यही कारण है कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार पर्यटन है। सरकार को सबसे ज्यादा राजस्व भी पर्यटन से ही जाता है, एवं सबसे ज्यादा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी पर्यटन क्षेत्र में ही है।
उत्तराखंड शायद देश का एकलौता राज्य है जिसने पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया है।
किन्तु आज यही पर्यटन उद्योग उत्तराखंड में सरकार की नीतियों के कारण ख़त्म होने की कगार पर है।
कोरोना संकट के कारण सम्पूर्ण राज्य में लगभग ढाई महीने तक लॉक डाउन रहा, किन्तु उसके बाद अनलॉक 1/2/3 में एक पर्यटन उद्योग को छोड़ कर बाकी समस्त उधोगों को सरकार द्वारा सब्सिडी या राहत पैकेज या अन्य रियायतें मिल रही हैं, लेकिन पर्यटन उधोग से जुड़े समस्त कर्मचारी और अन्य लोग या तो पर्यटन उद्योग छोड़ रहे हैं या आत्महत्या करने की कोशिश कर रहे हैं।
फ्रीलांस पर्यटन कंसलटेंट मनोज कोठारी ने बताया कि सरकार ने अपनी पीठ थपथपाने और अपने हाई कमान को ख़ुश करने की लिए कई कागज़ी घोषणाएं की जरूर हैं, लेकिन वो धरातल पर नहीं उतर सकती हैं क्योंकि गाइडलाइन इतनी सख्त कर दी हैं कि कोई भी पर्यटक यहाँ आना नहीं चाहेगा।
जैसे सरकार ने कहा कि कोई भी व्यक्ति उत्तराखंड घूमने आ सकता है किन्तु उसको कम से कम 7 दिन की बुकिंग करानी होगी और साथ है कोरोना नेगेटिव की रिपोर्ट भी दिखानी होगी।
अब अगर कोई व्यक्ति अपनी पत्नी एवं दो बच्चों की साथ दिल्ली से नैनीताल/कॉर्बेट घूमने आना चाहता है तो आम तौर पर वो 2 दिन की बुकिंग करता है लेकिन अब उसको 7 दिन की बुकिंग करनी होगी यानि जबरदस्ती 5 दिनों का अतिरिक्त खर्चा करना पड़ेगा और साथ ही कोरोना नेगेटिव की रिपोर्ट की लिए हॉस्पिटल में अलग से पैसा देना पड़ेगा। सामान्यता जो खर्चा 15 से 20 हज़ार का होना चाहिए वो खर्चा 70 से 80 हज़ार का होगा। अब इन परिस्थिति में कौन पर्यटक उत्तराखंड आना चाहेगा?

दूसरी बात सरकार ने उन सब शहरो को हाई कोविड जोन या रेड जोन घोषित किया है जहाँ से सबसे ज्यादा पर्यटक उत्तराखंड आते हैं, जैसे दिल्ली एनसीआर, मुंबई, गुजरात। इन परिस्थिति में कहाँ से पर्यटक उत्तराखंड आएगा?

तीसरी बात सरकार कहती है कि हमने पर्यटन क्षेत्र खोल दिया, होटल, मोटेल, रिसोर्ट सब खोल दिए किन्तु स्विमिंग पूल, बार, रेस्टोरेंट, कांफ्रेंस हॉल बंद रहेंगे और 50 से ज्यादा लोग इकट्ठा नहीं होंगे। सवाल ये है की जब पर्यटक की लक्ज़री की सब चीज़ें बंद हैं तो इन परिस्थिति में पर्यटक यहाँ क्यों आएगा??
सरकार को बेहद गौर से इन सब बातों को सोच कर नयी गाइडलाइन बनानी चाहिए एवं पर्यटन उद्योग को आर्थिक पैकेज भी देना चाहिए।
आर्थिक पैकेज के रूप में डायरेक्ट कैश ट्रांसफर के अलावा अगले दो साल तक टेक्स में छूट, लोन की किस्तों में छूट, ब्याज में छूट, रोड टैक्स में छूट आदि रियायतें देनी चाहिए, जिससे उत्तराखंड की लाइफ लाइन पुनर्जीवित हो सके।

विजय त्रिपाठी और मनोज कोठारी की कलम से…….

13 Replies to “पहाड़ एक्सप्रेस की पर्यटन और होटल इंडस्ट्री से जुड़े हुए लोगों से खास मुलाकात, जानिए उत्तराखंड के पर्यटन से जुड़े लोगों का दर्द उन्हीं की जुबानी….. पर्यटन व्यवसाय की बदहाली पर सरकार की खामोशी क्यों?”

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