उत्तराखंड में बढ़ती भू कानून की मांग को लेकर युवा कवियत्री गीतम भट्ट शर्मा की पहाड़ी कविता जरूर पढ़ें

उ लगाल तुमर गाड़- भीड़ में चाहा

तुम चाइए रौला

उ खोद जाल जेसीबी मशीनोंली

तुमार पितरोकी भूमि

तुम के नी कै सकला

 उ तुमर द् याप्तों थानों तक पूजी जाल

उ बखत तुम कैके धत्याला

उ तुमर बजानिक पाणी

बंद बोतल में बेचाल

और तुम तीसे रई जाला

उ बसि जाल तुमरि

स्यार और टनव में

तुम नांतीनन के क्या दिखाला

उ तुमर धार जंगोवान में

होटल रिजॉर्ट बनाल

तुम उनर भान माजने रै जाला।

 

– गीतम भट्ट शर्मा  

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