ग्रीन हिल्स की टीम द्वारा जनजागरूकता अभियान के अंतर्गत गांव गांव जाकर ग्रामीणों को बताया जा रहा है बिच्छू घास का महत्व


नैशनल मिशन ऑन हिमालयन स्टडीस के अंतर्गत पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा ग्रीन हिल्स ट्रस्ट को वित्त पोषित परियोजना “उत्तराखंड में जंगली पौधे बिच्छू बूटी की आजीविका संवर्धन की क्षमता की तलाश” के अंतर्गत ग्रीन हिल्स द्वारा पोषण से परिपूर्ण बिच्छू घास द्वारा प्रोडक्ट डेवलपमेंट पर कार्य किया जा रहा है। हैदराबाद स्तिथ ‘नैशनल कोमोडिटीस मैनिज्मन्ट सर्विसेज़ लिमिटेड’ एवं गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर भी इस प्रोजेक्ट के अन्य पार्टनर हैं। 

ग्रीन हिल्स ट्रस्ट की सचिव डा वसुधा पंत इस प्रोजेक्ट की मुख्य वैज्ञानिक एवं को-ऑर्डिनेटर हैं जिनकी निगरानी में इस प्रोजेक्ट पर पूर्ण रूप से कार्य किया जा रहा है। 

इस प्रोजेक्ट का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य गांवों में जाकर बिच्छू बूटी (शिशुणे) की उपयोगिता को बताना और साथ ही इसके द्वारा निर्मित प्रोडक्टस की जानकारी देकर लोगों को इससे स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना है।

इस संदर्भ में ग्रीन हिल्स की टीम द्वारा स्याल्दे ब्लाक के ग्राम कनकोट में जन-जागरूकता मीटिंग ग्राम प्रधान गोपाल सिंह की अध्यक्षता में की गई जिसमें 44 लोगों ने प्रतिभाग किया। ग्रीन हिल्स की टीम में भूपेंद्र वल्दिया, दीपक जोशी, पुष्पा वल्दिया एवं पंकज शामिल रहे।

इस परियोजना के साथ हमारा एवं मिशन का उद्देश्य है की पोषण से परिपूर्ण बिच्छू बूटी (शिशुण) से निर्मित खाद्य पदार्थों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाई जा सके जिससे पर्वतीय वासियों को आजीविका का साधन मिले।