राजकीय महाविद्यालय गणाई गंगोली एवं अवनि स्वयं सहायता समूह के संयुक्त तत्वाधान में “स्टार्ट अप इको सिस्टम इन उत्तराखंड” विषय पर वेबीनार का हुआ आयोजन

कल दिनांक 29.7.2021 को राजकीय महाविद्यालय गणाई गंगोली एवं अवनि स्वयं सहायता समूह के संयुक्त तत्वाधान में “स्टार्ट अप इको सिस्टम इन उत्तराखंड “विषय पर एक वेबीनार का आयोजन किया गया। 

वेबिनार का प्रारंभ रविशंकर विश्वकर्मा ने विषय से सबको अवगत करवाया और विषय पर राज्य और केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों को बताया। वेबिनार को विधिवत प्रारंभ करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफ़ेसर आनंद प्रकाश सिंह ने स्टार्ट अप इको सिस्टम इन उत्तराखंड विषय की महत्ता को बताते हुए और कोरोना महामारी के दौर में रोजगार को अपनाने का आह्वान किया और महाविद्यालय के छात्र छात्राओं से अपनी क्षमता के अनुसार रोजगार अपनाने को कहा। 

तत्पश्चात वेबीनार की वक्ता अवनि स्वयं सहायता समूह की प्रतिनिधि उमा कापड़ी ने उक्त विषय पर प्रकाश डालते हुए अवनी स्वयं सहायता समूह किस प्रकार रोजगार उत्पन्न कराने का कार्य करता है इसके विषय में बताया। उन्होंने बताया कि अपनी संस्था किसी व्यक्ति के रोजगार के विचारों को मंच प्रदान करने का कार्य करती है। 

वर्तमान में अवनी संस्था पिरुल से बिजली बनाने मशरूम उत्पादन का कार्य, सिलाई बुनाई, कढ़ाई का कार्य, मसालों के उत्पादन का कार्य करते हुए लोगो को रोजगार उपलब्ध करा रही है।

वेबिनार के द्वितीय वक्ता नवजोत जोशी ने वेबिनार के विषय पर विस्तार से अपने विचार रखते हुए उन्होंने युवाओं को स्वरोज़गार अपनाने को कहा। उन्होंने बताया कि स्वरोज़गार का विचार और उसको यथार्थ रूप में विकसित करने का कार्य किसी बच्चे के विकास की तरह ही है। हमें अपने विचारों को किस रूप में विकसित करना है ये हमारी अपनी क्षमता पर निर्भर करता है। 

वर्तमान में राज्य सरकार और केंद्र सरकार युवाओं को स्वरोजगार के प्रति उत्साहित करने के लिए विभिन्न योजनाओं का क्रियांवयन कर रही हैं। आत्मनिर्भर भारत, मुद्रा योजना आदि के द्वारा युवा अपना रोजगार प्रारंभ कर सकते हैं। उत्तराखंड प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न राज्य हैं, यहां के युवाओं के पास ना केवल पर्यटन के क्षेत्र में कार्य करने का अवसर हैं बल्कि फूल उत्पादन, मत्स्य पालन, मौन पालन, जड़ी बूटी उत्पादन आदि क्षेत्रों में भी कार्य कर अपनी आजीविका चला सकते हैं और लोगों को रोजगार के साधन उत्पन्न करा सकते हैं। राज्य के युवाओं को अपनी क्षमता को पहचानते हुए राज्य के संसाधनों का सदुपयोग कर करते हुए स्वरोजगार अपनाना चाहिए। छात्र छात्राओं से अपने आसपास उपस्थित संसाधनों को अपनी क्षमता अनुसार अपनी आय बढ़ाने में उपयोग करना चाहिए।

वेबिनार के अंत में संचालक रविशंकर विश्वकर्मा ने वेबिनार के दोनों वक्ताओं का धन्यवाद ज्ञापन किया और समस्त छात्र छात्राओं का आभार व्यक्त किया। वेबिनार में 94 प्रतिभागी वर्चुअल रूप से उपस्थित रहे। वेबिनार में महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे।