“क्या हाल हो गया है देश का” – खुशनुमा परवीन की स्वरचित कविता

क्या हाल हो गया है देश का
सब लड – मर रहे है जाति के नाम पर
नेता बैठे है चैन से और
जनता की कोई फिक्र नहीं, 
क्या हाल हो गया है देश का बेरोजगारों को रोजगार नहीं महंगाई चड़ी आसमान पर है जनता की कोई फिक नहीं
और बैठे नेता आराम से है, 
क्या हाल हो गया है देश का विद्यालयों में शिक्षक नहीं
अब बच्चों को कौन पढाएं सरकार बैठी आराम से है,
अब इनकों कौन समझाएं
क्या हाल हो गया है देश का कोरोना ने बेरोजगारी में और चार चांद लगा दिए
जो देश में थोड़ा बहुत रोजगार था उसे भी बन्द करवा दिए
क्या हाल हो गया है देश का

खुशनुमा परवीन